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Monday, October 8, 2012

skeleton with a copper locket containing a woman’s hair around its neck




वो दीद बेखबर हो गयी | मुझे देखकर खो गयी |
आप आयेंगे ये वादे पे, बैठे बैठे सहर हो गयी |
मेरा वजूद कहां खो गया | जिंदगी रहगुज़र हो गयी |
आपसे प्यार करना था, आपसे ही जबर हो गयी |
वक़्त रुकता कहां है, इक घडी, इक सफ़र हो गयी |
दिल को अब फुर्सत कहां, महज ये नजर रो गयी |

(लोगों के पास अब पढने का टाइम नहीं है , और अपना हाल कुछ यों है कि जब सोचता हूँ तो लिखता नहीं , और अब लिखता हूँ तो सोच नहीं पाता । क्षमा करना भाई लोग,जो भी है जैसा भी है, पढ़ें तो गाली न दें । इसलिए कुछ फुटकर ही लिखता रहूँगा ।)

Thursday, April 21, 2011

मेरी गज़लें : २

न सही जो मंज़िल का पता होता |
कोई वापसी का तो रास्ता होता |
जिंदगी मुझसे प्यार न करती,
तो आज मैं भी जिन्दा होता |
गर मैं ही न उम्मीदे वफ़ा करता,
वो क्यों मुझसे बेवफ़ा होता |



[far and beyond by Horia Popan]

Friday, March 18, 2011

मेरी गज़लें : १





इस बार तनहा नहीं आया हूँ |
दर्द मैं अपने साथ लाया हूँ |

जो मुझसे कुछ कहता ही नहीं,
मैं बेवकूफ उसे सब बता आया हूँ |

अपने अश्कों को जी भर निकालने दो,
मैं उसकी आँखों में जो समाया हूँ |

उतनी दूर दूर खुद को पाता हूँ,
जितने पास पास मैं तेरे आया हूँ |

प्यार करना चाहता हूँ तुझसे, 
जानता हूँ कि मैं ठुकराया हूँ |

 तुझसे तक नजर नहीं मिला रहा,
खुदसे इस क़दर शरमाया हूँ |


[पेंटिंग : लाना डेयाम की लेंडस्केप्स पेंटिंग्स की सीरीज़]